जातिवाचक संज्ञा किसे कहते हैं? (Jativachak Sangya Kise Kahate Hain)

आज हम जानेंगे कि जातिवाचक संज्ञा किसे कहते हैं? (Jativachak Sangya Kise Kahate Hain) तथा जातिवाचक संज्ञा के उदाहरण क्या क्या है एवं जातिवाचक संज्ञा को हम कैसे पहचानेंगे?

दोस्तो हम सभी को ज्ञात है की संज्ञा क्या होती है जिस शब्द से किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु, आदि का बोध हो उस शब्द को संज्ञा कहा जाता है। संज्ञा का अर्थ होता है  नाम अर्थात किसी वाक्य में जो भी शब्द किसी नाम को बताता है चाहे वह किसी व्यक्ति विशेष का नाम हो, किसी वस्तु का नाम हो, किसी स्थान का नाम हो, किसी भी प्राणी का नाम हो तो वह नाम बताने वाला शब्द संज्ञा होता है।

संज्ञा के कई भेद होते हैं जिनमें से संज्ञा के दूसरे भेद को जातिवाचक संज्ञा का नाम दिया गया है।

जातिवाचक संज्ञा किसे कहते हैं? (Jativachak Sangya Kise Kahate Hain)

Jativachak Sangya Kise Kahate Hain

जातिवाचक संज्ञा के नाम से ही विदित है कि किसी वाक्य में जिस भी शब्द से किसी व्यक्ति वस्तु स्थान प्राणी आदि के संपूर्ण जाति का बोध हो वह शब्द जातिवाचक संज्ञा की श्रेणी में आएगा। अर्थात हुआ शब्द जो जातिवाचक संज्ञा होता है अगर वह व्यक्ति के लिए आएगा तो वह ना सिर्फ उस व्यक्ति का बल्कि उसके संपूर्ण जाति का बोध कराएगा, जातिवाचक संज्ञा किसी स्थान के लिए आने पर उस स्थान विशेष के साथ-साथ उसकी संपूर्ण जाति का बोध कराएगा, इसी प्रकार किसी वस्तु के लिए आने पर भी जातिवाचक संज्ञा नासिर उस वस्तु विशेष बल्कि उसके संपूर्ण जाति के बारे में बताता है।


जातिवाचक संज्ञा के कुछ उदाहरण

उदाहरण 1 – संपूर्ण जाति से अभिप्राय है कि जैसे अगर किसी वाक्य में शिक्षक आता है तो शिक्षक जिस व्यक्ति के लिए आया है उसके साथ साथ दूसरे सभी व्यक्ति जो शिक्षक हैं उनका बोध कराएगा। क्योंकि शिक्षक का काम पढ़ाना है अर्थात पूरी शिक्षक जाति का ही काम पढ़ाना होता है।

उदाहरण 2 – अगर किसी वाक्य में डॉक्टर जातिवाचक संज्ञा के रूप में इस्तेमाल होता है तो डॉक्टर जिस व्यक्ति के लिए इस्तेमाल हुआ है उसके साथ साथ संपूर्ण डॉक्टर जाति का बोध कराएगा। अगर एक डॉक्टर का काम रोगी को स्वस्थ करना है इसका मतलब होता है कि सारे डॉक्टरों का काम रोगी को स्वस्थ करने का ही है। जातिवाचक संज्ञा किसी विशेष के लिए इस्तेमाल ना होकर उसके संपूर्ण जाति के लिए इस्तेमाल की जाती है।


जातिवाचक संज्ञा के कुछ और उदाहरण

दोस्तो अगर व्यक्तियों में जातिवाचक संज्ञा के उदाहरण के बात करें तो ऐसे शब्द जो वाक्य में किसी व्यक्ति के लिए इस्तेमाल किए गए हो परंतु उस शब्द से उस व्यक्ति विशेष के साथ-साथ उसकी संपूर्ण में जाति का बोध हो तो वह शब्द जातिवाचक संज्ञा कहलाएगा।

  • जैसे माता,  माता शब्द का प्रयोग किसी वाक्य में किसी महिला के लिए किया जाएगा परंतु उस शब्द से संपूर्ण माता जाती का बोध होगा। क्योंकि एक माता जो कार्य करती है,संपूर्ण माता जाति का भी मातृत्व के दृष्टिकोण से वही कार्य होता है।
  • पिता, अगर किसी वाक्य में किसी व्यक्ति विशेष के लिए पिता शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा तो वह पिता शब्द उस व्यक्ति के साथ-साथ संपूर्ण पिता जाति का बोध कराएगा। क्योंकि एक पिता दूसरे पिता से भी नहीं होता है दोनों का कार्य एक समान ही होता है।

चपरासी, अगर किसी वाक्य में चपरासी शब्द का इस्तेमाल होता है  तो वह जिस व्यक्ति के लिए इस्तेमाल हुआ है उस व्यक्ति के साथ साथ जितने भी और चपरासी हैं उन सभी का अर्थात् उनकी पूरी जाति का बोध कराया। क्योंकि चपरासी का अर्थ अलग-अलग नहीं होता उसका मतलब एक ही होता है जो हमेशा समान रहता है।

बच्चा, वाक्य में कहीं बच्चा शब्द का इस्तेमाल होने पर वह शब्द उस विशेष बच्चे जिसके लिए वह इस्तेमाल हुआ है उसके साथ-साथ  उसकी संपूर्ण जाति का बोध कराता है क्योंकि बच्चा सब लिख देने पर  वह दुनिया में जितने भी बच्चे हैं  उन सभी को दर्शाता है। इंजीनियर जैसे शब्द भी किसी व्यक्ति के लिए इस्तेमाल की जाती है अर्थात  वह संज्ञा है।

परंतु इंजीनियर लिख देने पर वह सारे इंजीनियर को दर्शाता है जिससे वह जातिवाचक संज्ञा बन जाता है एवं पूरे इंजीनियर जाति का बोध कराता है।

इसके बाद अगर बात करें प्राणियों मे जातिवाचक संज्ञा के उदाहरण की तो जैसे मछली। अगर किसी वाक्य में मछली शब्द का इस्तेमाल किया जाता है तो वह शब्द वहां जितनी भी मछलियां होती है उन सभी का अर्थात उसके संपूर्ण जाति का बोध कराती है मछली शब्द के लिखे होने पर वह विशेष ना रहकर, बहुत से मछलियों में से कोई भी हो सकती है।

खरगोश, वाक्य में सिर्फ खरगोश शब्द के लिखे होने पर यह स्पष्ट नहीं होता की  किस खरगोश का जिक्र हो रहा है सिर्फ खरगोश लिखे होने से संपूर्ण खरगोश जाति में से किसी को भी दर्शाया जा सकता है जिससे उस वाक्य में वह खरगोश शब्द जातिवाचक संज्ञा हो जाती है।

प्राणियों में सारे जीवित प्राणी सम्मिलित होते हैं जिससे प्राणी व्यक्ति की श्रेणी से भिन्न हो जाता है। किसी वाक्य में हाथी लिखी होने पर वह हाथी शब्द वहां संपूर्ण हाथी जाति का बोध कराता है, हाथी शब्द का इस्तेमाल सभी हाथियों के लिए किया जाता है जिससे यह जातिवाचक संज्ञा बन जाती है। इसी प्रकार तोता शब्द के किसी वाक्य में लिखे होने पर वह संपूर्ण तोता जाति का बोध का रहेगा क्योंकि उस जाति के सभी प्राणियों को तोता कह कर ही संबोधित किया जाता है।

तोता लिख देने पर पर वह विशेष ना रहकर पूरी जाति के लिए समान हो जाता है। इसी प्रकार प्राणियों में किसी वाक्य में यदि कुत्ता, मोर आदि जैसी और किसी भी अन्य प्राणी का नाम लिखा हो तो वह शब्द  सिर्फ उस विशेष के लिए न होकर उसकी पूरी जाति के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है अतः वह जातिवाचक संज्ञा बन जाते हैं।

वस्तुओं में अगर जातिवाचक संज्ञा के उदाहरण की बात करें तो जैसे मेज। यदि किसी वाक्य में मेज शब्द का इस्तेमाल किया जाता है तो वहां वह मेज शब्द सभी मेजो को दर्शाता है अर्थात जितने भी मेज होते हैं उन सभी के लिए एक ही शब्द इस्तेमाल होता है। जिस कारण वह मेज विशेष ना रहकर संपूर्ण जाति का हो जाता है। घड़ी जैसा शब्द भी जातिवाचक संज्ञा की श्रेणी में आता है, किसी बात में अगर घड़ी शब्द का प्रयोग किया जाता है।

तो वह घड़ी शब्द अन्य जितनी भी और घड़िया हैं उन सभी के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिससे जितनी भी घड़ियां है अर्थात पूरे घड़ी जाति का बोध हो जाता है। खिड़की, खिड़की शब्द का मतलब एक ही होता है जो हर जगह समान मतलब देता है, किसी वाक्य में खिड़की शब्द  का इस्तेमाल होने पर उस वाक्य में उपयोग हुआ शब्द जातिवाचक संज्ञा कहलाएगा क्योंकि वह विशेष ना रहकर संपूर्ण जाति का बोध कराएगा।

किताब शब्द का इस्तेमाल अगर किसी वाक्य में किया जाएगा, तो किताब को पढ़ा जाता है और यह बात हर किताब के लिए एक समान है इसीलिए किसी वाक्य में इसके लिखे होने पर यह किताब शब्द किसी विशेष का न रहकर  पूरे जाति का हो जाता है परिणामत: जातिवाचक संज्ञा कहलाता है। इन सभी के अलावा पंखा बल्ब आदि जैसे शब्द जब किसी वाक्य में इस्तेमाल की जाती हैं तब वहां ये शब्द  पूरी जाति का बोध कराती हैं जिससे यह शब्द जातिवाचक संज्ञा की श्रेणी में आ जाते हैं।

संज्ञा में स्थान का भी नाम आता है। वैसे स्थानों के नाम जो सभी के लिए समान हो यानी पूरी जाति का बोध कराएं, जातिवाचक संज्ञा कहलाते हैं। बाजार, यह एक स्थान होता है, ऐसे किसी स्थान जहां हम खरीदारी के लिए जाते हैं बाजार कहलाता है, अब हर ऐसे स्थान जहां लोग खरीदारी के लिए जाते हैं बाजार ही कहलाता है यानी बाजार शब्द का मतलब एक ही होता है  अतः किसी वाक्य में इसके लिखे होने पर यह हर उस स्थान का बोध कराएगा जिससे जिसे बाजार कहा जा सकता है जिससे बाजार शब्द विशेष न रहकर पूरी जाति का बोध कराता है। उस स्थान को मंदिर कहते हैं  जहां लोग पूजा अर्चना के लिए जाते हैं।

अब मंदिर शब्द का इस्तेमाल हर उस स्थान के लिए हो सकता है जहां लोग पूजा अर्चना के लिए जाते हैं इसीलिए किसी वाक्य में मंदिर शब्द के लिखे होने पर वह किसी विशेष का नहीं बल्कि पूरी जाति का बोध करा सकता है एवं जातिवाचक संज्ञा कहला सकता है। घर, हम सभी को ज्ञात है कि हम जहां रहते हैं उसे अपना घर कहते हैं, इसीलिए हर वह स्थान जहां कोई रह सकता है घर कहला सकता है।

जिससे किसी वाक्य में घर शब्द लिखा होने पर वह जितने भी घर होते हैं सभी का बोध करा सकता है। स्टेशन, सारे ऐसे स्थान जहां ट्रेन आकर रूकती है एवं ट्रेन खुलती है,स्टेशन कहला सकता है, और इसी प्रकार स्टेशन  भी किसी वाक्य में आने पर सारे स्टेशनों में से किसी का भी बोध करा सकता है, अर्थात यह शब्द भी पूरी जाति का बोध कराता है और जातिवाचक संज्ञा होता है। सड़क, पार्क एवं उन जैसे अन्य शब्द भी स्थान की श्रेणी में जातिवाचक संज्ञा के अंतर्गत आते हैं।

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