बीकॉम में कितने सब्जेक्ट होते हैं? | B.Com Subject In Hindi

दोस्तों यदि आपने 11वीं और 12वीं में commerce stream से पढ़ाई की है और 12वीं के बाद आप ग्रेजुएशन में बीकॉम में दाखिला लेना चाहते हैं तो B.com में कितने सब्जेक्ट होते हैं? यह सवाल आपके मन में जरूर आया होगा।

यहां इस आर्टिकल में हम मुख्यतः इसी की बात करेंगे कि b.com course में कितने सब्जेक्ट पढ़ने होते हैं?

दोस्तों आज के समय में विद्यार्थियों को करियर की tension दसवीं के बाद से ही होने लगती है, और भविष्य में वे जिस भी प्रोफेशन में जाना चाहते हैं उसी को ध्यान में रखकर उन्हें अपने पढ़ने के लिए विषय चुनना होता है। 

जो विद्यार्थी बैंकिंग, फाइनेंस और अकाउंट आदि में रुचि रखते हैं, वे कॉमर्स का चुनाव करते हैं।

बीकॉम में कितने सब्जेक्ट होते हैं?

Chartered accountant commerce field में सबसे प्रचलित है। और इसके लिए कॉमर्स के छात्रों को ग्रेजुएशन में बीकॉम करना होता है।

जो विद्यार्थी बीकॉम में दाखिला लेना चाहते हैं, उन्हें इसके सारे विषयों के बारे में सही जानकारी होना जरूरी है, और यहां हम इसी की बात करेंगे।

B.com में क्या पढाई होती है?

B.Com Subject In Hindi

B.com का पूरा नाम bachelor of commerce है जो कि एक अंडर ग्रेजुएशन कोर्स है। 12वीं के बाद जिस तरह साइंस वाले छात्र बीएससी और आर्ट्स वाले छात्र b.a. करते हैं उसी तरह कॉमर्स वाले b.com करते हैं।

Basically, कॉमर्स के अंतर्गत आपको वाणिज्य से संबंधित विषय पढ़ने होते हैं।

जैसा हमने ऊपर कहा, यदि कोई भविष्य में चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहता है तो वह अंडर ग्रेजुएशन में b.com का ही कोर्स करता है। 

B.com 3 साल का कोर्स है, बीकॉम की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद आपको कॉमर्स में बैचलर की डिग्री मिल जाती है।

सामान्यत: 3 वर्ष की अवधि वाले इस कोर्स में 6-6 महीने के 6 सेमेस्टर होते हैं, पर कई कॉलेजों में यह year wise भी बंटी हो सकती है।

कॉमर्स से 12वीं पूरी करने के बाद आप b.com course offer करने वाले कॉलेज में बीकॉम में एडमिशन ले सकते हैं।

हर कॉलेज में एडमिशन के लिए अलग-अलग cut off marks जाते हैं। अब b.com के subjects के बारे में बात करते हैं।

B.com में कितने विषय पढ़ने होते हैं?

हमने बताया कि बीकॉम 3 वर्ष की अवधि का कोर्स है, जिस दौरान इसमें 6 सेमेस्टर होते हैं।

आजकल ज्यादातर कॉलेज में बीकॉम की पढ़ाई सेमेस्टर वाइज ही होती है। बीकॉम ऑनर्स करने पर आपका एक मुख्य सब्जेक्ट होता है, जिसके साथ आपको हर सेमेस्टर में कुछ एडीशनल सब्जेक्ट पढ़ने होते हैं।

बीकॉम के मुख्य subjects (B.Com Subject)

  • Business law
  • Economics
  • Mathematics
  • Banking
  • Bookkeeping
  • Tax
  • English
  • Information technology

यह सारे और इनके अलावा कुछ अन्य सब्जेक्ट भी हो सकते हैं जो main subject होते हैं, इनके साथ आपको कुछ एडीशनल सब्जेक्ट भी पढ़ने होते हैं।

हर सेमेस्टर में कुछ compulsory/main और कुछ additional विषय होते हैं।

B.Com 1st year/semester 1 और 2 के Subjects

Financial Accounting- आसान शब्दों में इसका मतलब होता है व्यापार से संबंधित वित्तीय लेनदेन का सारांश उसका विश्लेषण और रिपोर्टिंग देना।

Environment Study- Environment study विषय में पर्यावरण से संबंधित सभी जरूरी चीजों के बारे में अध्ययन कराया जाता है, जैसे पर्यावरण को साफ सुथरा रखना, पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए उठाए गए कदम, इसके लिए निर्धारित जरूरी नियम आदि के बारे में।

Business Organization and Management- बड़े व्यावसायिक संगठन किस तरह से काम करते हैं, वे finance और वित्तीय मामलों से कैसे जुड़े होते हैं, और साथ ही उनका प्रबंधन किस प्रकार किया जाता है, और किस तरह किया जाना चाहिए, इन सब के बारे में यह विषय है।

Micro Economics- Micro economics, economics की एक शाखा है, जिसके अंतर्गत यह अध्ययन किया जाता है कि किस प्रकार अर्थव्यवस्था के व्यक्तिगत अवयव, परिवार एवं फर्म, विशिष्ट रूप से उन बाजारों में सीमित संसाधनों के आवंटन का निर्णय करते हैं, जहां वस्तुएं एवं सेवाएं खरीदी एवं बेचीं जाती हैं।

Computer- कंप्यूटर के बारे में हम सभी को पता ही है, BCom में मुख्य सब्जेक्ट के साथ कंप्यूटर जैसे विषय भी पढ़ने होते हैं। इस विषय में आपको कंप्यूटर की बेसिक नॉलेज के साथ-साथ आज के समय के लिए जरूरी चीजों के बारे में भी बताया जाता है। 

Business Statistics- business की विभिन्न समस्याओं का अध्ययन, विश्लेषण और समाधान करने में सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग ‘व्यावसायिक सांख्यिकी’ के अन्तर्गत किया जाता है। 

Business Law- इसे ही Commercial law भी कहा जाता है। हिंदी में, व्यावसायिक कानून या ‘व्यावसायिक सन्नियम’ कानूनों के उस समुच्चय का नाम है जो व्यापार, वाणिज्य, क्रय-विक्रय, में लगे व्यक्तियों एवं संगठननों के अधिकार, सम्बन्ध, तथा व्यहार का नियमन करता है। 

English, Secondary language- हर year में मुख्य सब्जेक्ट के साथ एक language जैसे कि English या फिर कोई अन्य secondary language जैसे Hindi, Marathi या फिर कोई अन्य भी रह सकता है। 

B. Com 2nd year/semester 3 और 4 के Subject

Financial Accounting- इस विषय का मतलब हम उपर जान ही चुके हैं,first year के बाद आपको सेकंड ईयर में भी यह subject पढ़ना होता है सेकंड ईयर में आपको इसकी और deep knowledge मिलती है।

Principles of Business Management- हिंदी में इसका मतलब व्यवसाय प्रबंधन के सिद्धांत होता है। यह विषय बिजनेस मैनेजमेंट से संबंधित होता है। क्योंकि कॉमर्स व्यापार और वाणिज्य से ही जुड़ा है इसीलिए बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई जरूरी होती है। 

Corporate Law- कॉरपोरेट कानून शेयरधारियों, निदेशकों, कर्मचारियों, ऋणदाताओं तथा अन्य हिस्साधारियों, जैसे उपभोक्ताओं, समुदायों तथा पर्यावरण फ़र्म के आंतरिक नियमों के तहत एक-दूसरे के बीच की अंतःक्रियाओं का अध्ययन होता है। 

Advanced Microeconomics- यह microeconomics का advance रूप होता है। Microeconomics अर्थशास्त्र की एक शाखा है जो अर्थव्यवस्था के व्यक्तिगत अवयव, परिवार एवं फर्म, विशिष्ट रूप से उन बाजारों में सीमित संसाधनों के आवंटन का निर्णय आदि की पढ़ाई है। इसमें microeconomics का और गहन अध्ययन होता है।

Marketing Management- यह marketing की तकनीकों का व्यावहारिक उपयोग है। इसका काम माँग के स्तर, समय एवं संरचना को इस प्रकार से प्रभावित करना है ताकि संगठन के उद्देश्यों की पूर्ति की जा सके। 

Income Tax Law- नाम से समझ में आ रहा होगा इसके अंतर्गत इनकम टैक्स और उससे संबंधित दूसरी जरूरी चीजों की पढ़ाई की जाती है। Finance और accounting के लिए इनकम टैक्स से संबंधित सारी जानकारी होना जरूरी है।

Cost Accountancy- अलग-अलग वैकल्पिक कार्यविधियों के एकत्रीकरण, विश्लेषण, मूल्यांकन एवं संक्षेपण को लागत लेखांकन (Cost accounting) कहते हैं। 

Business Mathematics- Business mathematics वह गणित है, जो वाणिज्यिक उद्यमों में प्रयुक्त होता है। इसका उपयोग वस्तु की गणना, प्रचार, वित्तीय विश्लेषण, बिक्री का पूर्वानुमान लगाने आदि में किया जाता है। 

English, Secondary language- 2nd year में भी एक language subject रहता है। आप English या फिर कोई अन्य secondary language जैसे Hindi, Marathi या फिर कोई अन्य चुन सकते है। 

B.Com 3rd year/semester 5 और 6 के Subjects

Advanced Accounting- इस विषय के अंतर्गत accounting operations, patterns, foreign currency operations, जैसी चीजों की पढ़ाई की जाती है। इस विषय में छात्र advanced financial accounting, lease contracts, pension funds, इत्यादि के बारे में भी पढ़ते हैं।

Indirect and Direct Taxes- कॉमर्स का यह विषय भी टैक्स से संबंधित होता है। यह दोनों टैक्स फाइनेंस से किस तरह संबंधित होते हैं, इत्यादि की पढ़ाई इस विषय में होती है।

Business Administration- यह विषय भी बिजनेस यानि व्यापार और उसमें कॉरपोरेटर इत्यादि से संबंधित होता है। BCom के 3rd year में इस विषय को चुनने वाले विद्यार्थी business administration के बारे में सीखते हैं। 

Macro Economics- Macroeconomics में समस्त आर्थिक क्रियाओं का संपूर्ण रूप से अध्ययन किया जाता है। मैक्रोइकॉनॉमिक्स अर्थव्यवस्था एक पूरे रूप में संचालन का विश्लेषण करती है। यह भी कॉमर्स का एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है।

Banking and Finance- नाम से समझ में आ रहा है कि इस विषय के अंतर्गत बैंकिंग यानी बैंक में होने वाले लेनदेन, उससे संबंधित प्रक्रियाओं आदि के बारे में पढ़ना होता है। Finance और banking वित्तीय क्षेत्र में हमेशा ही important subjects होते हैं।

Auditing- वित्तीय मामलों में लेखा-जोखा सुरक्षित रखने की जरूरत होती है और इस विषय में उन्हीं के बारे में पढ़ा जाता है।

Entrepreneurship- किसी बिजनेस की शुरुआत करना एंटरप्रेन्योरशिप कहलाता है। कॉमर्स के अंदर यह विषय भी आता है, जिसमें विद्यार्थियों को व्यापार की अच्छे से जानकारी दी जाती है।

Business Communication- Business Communication में किस प्रकार से एक बिजनेस दूसरे बिजनेस के साथ mutually चलाया जा सकता है, और इसके management आदि के बारे में पढ़ाया जाता है।

English या Secondary language- Language सब्जेक्ट के साथ फिर वही बात है, मुख्य सब्जेक्ट के साथ एक language जैसे कि English या फिर कोई अन्य secondary language जैसे Hindi, Marathi या फिर कोई अन्य भी रह सकता है।

Conclusion

ऊपर इस आर्टिकल में हमने बीकॉम के अंतर्गत आने वाले सारे सब्जेक्ट के बारे में बात की।

12वीं के बाद जो विद्यार्थी बीकॉम में दाखिला चाहते हैं उन्हें इसके सारे विषयों के बारे में पता होना चाहिए जिससे वे अपने लिए बेहतर निर्णय ले सके।

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